परिवार बिना त्योहार (Poem)
क्या पर्व ,क्या उमंग, क्या त्योहार ?
जब साथ ही ना हो पूरा परिवार,
क्या शादी, क्या रक्षा बंधन, क्या दशहारा ?
जब एक के बिना है पूरा परिवार अधूरा ,
जाने कब होगा पूरा परिवार फिर से साथ,
मनाएंगे दीवाली पकड़े हाथों में हाथ,
पर थोड़ी खुशी के बाद फिर से लौट जाना होगा वही ,
जहां एक है कहीं और दूसरा है कहीं ।
Poem by Bandana Kanak

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